Friday, February 15, 2013

Tera chand

उसके ह्रदय
की सुंदरता की सीमा
मेरी सोच में नहीं समाती
पर मेरा दिल खो जाना चाहता है
उसके प्रेम के अनंत आकाश में

चंद्रमा की तरह
जो थोडा दूर है
पर धरती का एक अभिन्न अंग  है।

PS: मेरी प्यारी प्रेमिका वैलेंटाइन्स डे तुम्हे भी बहुत मुबारक हो। एक दिन का इन्तेजार करना पड़ा है पर मुझे पता है यह छोटा सा पोस्ट स्क्रिप्ट तुम्हारे चेहरे पे थोड़ी मुस्कान तोह ले ही आएगा अगर कविता अपना काम न कर पायी तोह 

Thursday, February 14, 2013

Kankad


कंकड़
एक आदर्श जीव है

जो खुदको और 
अपनी पथरीली सीमा को समझता है 

इसकी कोई खुशबू नहीं है जो हमें याद हों 
नाही इसकी इछा किसी को है  
पर फिर भी
यह अपनी ललक और शीतलता
को अपनी गरिमा बना के रखता है 

मैं एक भारी पश्चाताप महसूस करता हूँ 
जब भी इसके अमर्तय शरीर
को मैं अपने हाथों में पकड़ता हूँ 

कंकड़ की शीतलता को वश में नहीं किया जा सकता
बस इसकी श्पष्टता को 
अपनी आखों से महसूस कर सकते है 

Saturday, February 2, 2013

Vishwash

हमारे स्वपन और हम
कपडे के उस सिलाई की तरह है
जिसका एक छोर अंत की तरफ जाता ही है
हर बार यह आवश्यक नहीं 
उन का अंत शानदार हो
आवश्यक है हमारा
उस धागे को अपने विश्वाश से बाधना।

Wednesday, January 23, 2013

Shabdo ke sansar mein


शब्दों के संसार में मैं एक पेड़
की तरह जड़वत खड़ा हूँ,
पतझड़ का मौसम
अभी पीछे गया है साथ में
मेरे शब्दों को भी ले गया है,
मैं इंतजार में हूँ
बरसात के मौसम का
आओ मेघा लेके
शब्दों की फुहार
उनका मधुर संगीत
बन के बहो एक नदी
कर दो आज़ाद
मुझे मेरे ख्यालों से
जिनका मैं हूँ एक बंदी ।

Friday, December 7, 2012

Mujhe jeena aata hai

अर्थ
जो जीवंत हो उठे
मेरे सामने
अगर
ये शब्दों की देह से होकर
न आते
तोह कैसे आते

मैं हंसता हूँ, प्यार करता हूँ
रोता हूँ, लड़ता हूँ
चुप हो जाता हूँ
परे नहीं हूँ सबसे
पर मैंने जीना सीखा है
जीवन जीने की कोई कला नहीं।

Tuesday, November 27, 2012

Map


मैं उस सड़क पर था
जहा मेरे पैर नहीं थे
मैं चल नहीं सकता था पर
उम्मीद लगा रखी थी उड़ने की
चला था मंजिल तलाश करने,

नक्शा था मेरे पास
पर तेरी आवाज कानो में
गुज रही थी
रोका मैंने उस हवा को कानों में जाने से
पर क्या करू नक्शे ने
दे दिया धोका मुझे
और तेरी आवाज ने पंहुचा दिया था
घर तेरे।

Wednesday, November 7, 2012

Phir ek koshish

आज फिर अपने दिल
को रोक नहीं पाया
इसने मेरे कदमो का सहारा ले
घसीटा मुझे उसके दरवाजें तक

फिर कुछ सही करने की
एक और कोशिश
करना चाहता है शायद दिल,
जानते हुए कि
उसके दरवाजें बंद मिलेंगे मुझे,
और
खिड़की पे लिखा होगा
"चलें जाओ कहीं दूर यहाँ से"।

Monday, November 5, 2012

Dhage aur saansein

बहुत सी बातें
मैंने अपने अपने दिल में रखी हैं 
जानते हुए कि 
सभी जानते है उन बातों को,

वोह बातें जो कि 
किसी निश्चित योजना के तहत 
अनेक घटनाओ के धागों  
को मिला कर मैंने बनाया था,

लेकिन अब याद नहीं मुझे 
दिल के बीचोंबीच मैंने 
बहुत से लम्हों को तुम्हारा नाम
देकर क्यूँ छुपाया था।